कर्नाटक में ‘एनालॉग’ पनीर का उत्पादन और बिक्री एक साल तक प्रतिबंधित

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नई दिल्ली/बेंगलुरु, 22 अगस्त। कर्नाटक सरकार ने त्योहारी सीजन के पहले महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जन स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के मद्देनजर ‘एनालॉग’ पनीर (गैर डेयरी) की बिक्री, उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति पर एक साल लिए प्रतिबंध लगा दिया है।

कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों ने शनिवार को जारी बयान में यह जानकारी दी। विभाग के आयुक्त श्रीनिवास के. ने बताया, ‘‘विभाग ने 17 अगस्त को अधिसूचना जारी कर राज्य में एनालॉग/गैर-डेयरी पनीर के निर्माण, प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण, आपूर्ति, थोक और खुदरा बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया है।’’

अधिकारियों के मुताबिक, ‘एनालॉग’ पनीर दूध से तैयार किए जाने वाले सामान्य पनीर का विकल्प है, जिसे दूध के बजाए वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल कर बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पादों को उपभोक्ताओं के सामने ‘पनीर’ के रूप में लेबल नहीं किया जा सकता है, न ही उनका विपणन या बिक्री इस नाम से की जा सकती है।

विभाग ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक एवं खाद्य योजक) नियम, 2011 के तहत पनीर एक मानकीकृत खाद्य उत्पाद है, जिसे दूध से तैयार किया जाता है। इस पनीर में दूध की वसा एक प्रमुख घटक होती है और उसकी जगह वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-डेयरी सामग्री का इस्तेमाल मान्य नहीं है।

विभाग ने कहा कि कर्नाटक में पनीर के कई नमूनों की जांच की गई और उनमें मिलावट नहीं पाई गई। हालांकि, जन स्वास्थ्य के हित में एनालॉग पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है। यह आदेश फ्रोजन मिठाई, प्रोसेस्ड चीज और मिश्रित वसा स्प्रेड जैसे मानकीकृत खाद्य उत्पादों पर लागू नहीं होगा क्योंकि इनके लिए अलग-अलग मानक पहले से तय हैं। विभाग ने खाद्य कारोबारियों को चेतावनी दी है कि वे किसी भी खाद्य उत्पाद या व्यंजन में एनालॉग /गैर-डेयरी पनीर का इस्तेमाल, उसका भंडारण, आपूर्ति या बिक्री नहीं करें।

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