एनडीएमसी ने अपशिष्ट से संसाधन की अवधारणा को बढ़ावा देते हुए उपराज्यपाल के लोक निवास को 1,000 किलोग्राम जैविक खाद सौंपी

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने आज दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल कार्यालय – लोक निवास को 1,000 किलोग्राम जैविक खाद सौंपी। यह जैविक खाद एनडीएमसी की हाई–टेक नर्सरी, मधु लिमये मार्ग, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली स्थित विकेंद्रीकृत कम्पोस्टिंग सुविधा में स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत गीले कचरे एवं बागवानी अपशिष्ट से तैयार की गई है। इस अवसर पर एनडीएमसी की ओर से श्री राजीव कुमार जैन, सलाहकार (एसडब्ल्यूएम) तथा डॉ. अंकिता राय, एसएमओ ने खाद के बोरे लोक निवास के प्रतिनिधियों को सौंपे।

जैविक खाद का उत्पादन पर्यावरण–अनुकूल प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, जिसमें स्थानीय स्तर पर उत्पन्न गीले कचरे एवं बागवानी अपशिष्ट को उक्त सुविधा में वायर–मेश राउंडर्स के माध्यम से प्रसंस्कृत किया जाता है। परिपक्व जैविक खाद तैयार होने में लगभग 2–3 माह का समय लगता है। यह विकेंद्रीकृत प्रक्रिया कचरे का उसके स्रोत के निकट ही प्रसंस्करण सुनिश्चित करती है, जिससे कचरे के परिवहन तथा अंतिम निस्तारण की आवश्यकता में कमी आती है।

इस कम्पोस्टिंग सुविधा का माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली द्वारा 25 सितंबर 2026 को भी दौरा किया गया था। यह दौरा टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन एवं स्वच्छता के क्षेत्र में एनडीएमसी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा के लिए किया गया था।

स्वच्छता ही सेवा 2026 के अंतर्गत एनडीएमसी ने जैविक कचरे के उपयोगी पुनःप्रयोग को बढ़ावा देने तथा टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन की पद्धतियों को प्रोत्साहित करने के अपने प्रयासों को और अधिक सुदृढ़ किया है। अभियान अवधि के दौरान अब तक 11 विद्यालयों में 1,250 किलोग्राम जैविक खाद वितरित की जा चुकी है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों एवं विद्यालय समुदायों को स्रोत पर कचरा पृथक्करण, कम्पोस्टिंग तथा पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी अपशिष्ट प्रबंधन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, एनडीएमसी ने 30 और विद्यालयों में 3,000 किलोग्राम जैविक खाद वितरित करने की योजना बनाई है। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों तथा व्यापक समुदाय में स्रोत पर कचरा पृथक्करण, विकेंद्रीकृत कम्पोस्टिंग तथा ‘अपशिष्ट से संसाधन’ की अवधारणा के महत्व के प्रति जागरूकता को और मजबूत करना है।

यह पहल एनडीएमसी की कचरे का स्रोत पर

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